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Saturday, 6 February 2016

भीगी सी एक नज्म

बारीश का मौसम है,
याद किसी की आ रही है।
आँखें नम हो रही है।
लेकिन वो कहाँ है?
जिसका हमें इंतजार है...

 जी नही चाहता की तुम्हें,
इक सपना समझ के भूल जाएँ।
क्योंकी इस दिल को तो,
तड़पने मे ही मजा आ रहा है।

तुमसे लागी लगन को,
मिटाएँ भी तो कैसे?
कंबख्त इन निगाहों मे,
तुम्हारी ही छवी है।

हमारे लिए आसान नही, तुम्हे भूल ना।
चाहें तुम हमें मुड़ के भी ना देखो।
पर हम तो वही खडे हैं,
जहाँ तुम हमें छोड़ आए थे।

हमारी जिंदगी में आओ,
सावन का पहला बादल बन के।
फिर देखों  दोनों ऐसे भिगेंगे,
प्यार की बारीश में।
के आँसू और पानी अलग ना लगे।
बस तुमसे मिलने की चाह में,
वो खुशी में बदल जाए।
हमेशा हमेशा के लिए...



लगता है, इंतजार ही इंतजार लिखा है,
हमारे नसीब में।
पर इस नसीब को भला कैसे कोसूँ?
अनजाने मे शायद फिर मिलना लिखा हो,
इसी नसीब में...

तुम्हारी यादें मेरी आँखों से,
दिल में समा गई।
अब इन्ही यादों की तुम्हे है कसम।
लौट आओ... जहाँ हो।