Sunday, 19 April 2020

मुस्कुराते रहेंगे

एक दुसरे से दूर है हम
फिर भी दुरीयाँ नही है।
एक दुसरे के बिना जिने की
मजबुरी है,
लेकिन हम मजबूर नहीं।


देखो, आसमान में कितने तारें
रहते हैं बिखरे-बिखरे,
फिर भी उनके अस्तित्त्व से,
करते है रोशन अंबर को।


सूरज-चंदा कभी न मिलते
पर ये प्रकृति उनसे है।


धरती-गगन में हमेशा जुदाई
बारिश के जरिये प्यार बरसाते हैं...

वैसे ही हम बरसते रहेंगे...
अपने-अपने आकाश में,


बारिश की बुँदों को महसूस करेंगे
हवा के झोकों से बाते किया करेंगे
अपने अटूट रिश्ते का एहसास,
कभी कम न हो।


गाँव की मिट्टी, पेड और पौधें,
पंछियो की टोली, नदीयाँ का पानी
पता है इन्हें, हमारी जुदाई की कहानी


अपना आकाश अलग है।
बरसते रहेंगे...
जहाँ है वहाँ मुस्कुराते रहेंगे...




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